मौजूदा शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ी, हाईकोर्ट ने पूछा इनके लिए TET परीक्षा क्यों नहीं


शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) लागू होने के बाद भी शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं करने वाले लाखों शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।हाईकोर्ट ने एक याचिका पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद से पूछा हैकि आरटीई लागू होने से पहले मौजूद शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) या राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट कैसे दी जा सकती है।




 चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वी. कामेश्वर राव की पीठ ने केजरीवाल सरकार और नगर निगमों को भी चार सप्ताह में हलफनामा देने को कहा है। हाईकोर्ट ने सरकार और अन्य *पक्षों से पूछा कि यदि शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं तो क्या उन्हें नौकरी से हटाया जाएगा या उनसे कोई अन्य काम लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब 12 फरवरी, 2019 को होगी।



गैर-सरकारी संगठन जस्टिस फॉर ऑल की जनहित याचिका पर पीठ ने यह आदेश दिया। याचिका में पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने की मांग की गई है। इस पर दिल्ली सरकार की ओर से अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी ने पीठ को बताया कि यदि अदालत शिक्षकों को सीटीईटी में शामिल होने के लिए आदेश देती है तो उन्हें कोई परेशानी नहीं है।
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